Heart Attack क्यों आता है? कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में “हार्ट अटैक” एक ऐसा शब्द बन गया है, जिसे सुनते ही दिल बैठ-सा जाता है। पहले इसे बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन आज 30–40 साल के युवा भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। कोई जिम में एक्सरसाइज़ करते हुए गिर पड़ता है, तो कोई ऑफिस में काम करते-करते। सवाल यही है—आख़िर हार्ट अटैक क्यों आता है? कब आता है? और सबसे ज़रूरी, इसे कैसे रोका जा सकता है?
हार्ट अटैक सिर्फ़ एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं है, यह हमारी जीवनशैली की एक सख़्त चेतावनी भी है।
हार्ट अटैक क्या होता है?
हार्ट अटैक को मेडिकल भाषा में मायोकार्डियल इंफार्क्शन (Myocardial Infarction) कहा जाता है। इसका मतलब है—दिल की मांसपेशियों तक खून का प्रवाह अचानक रुक जाना।
दिल को लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है, जो उसे कोरोनरी आर्टरी (Coronary Arteries) के ज़रिए मिलती है। जब इनमें से किसी आर्टरी में ब्लॉकेज हो जाता है, तो दिल की मांसपेशियों का एक हिस्सा काम करना बंद कर देता है। यही स्थिति हार्ट अटैक कहलाती है।
हार्ट अटैक क्यों आता है? (मुख्य कारण)
1. धमनियों में चर्बी जमना (Cholesterol Blockage)
सबसे आम कारण है—धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट का जमना। इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है।
गलत खान-पान, तला-भुना खाना और ज्यादा फास्ट फूड धीरे-धीरे आर्टरी को संकरा कर देता है।
2. हाई ब्लड प्रेशर (High BP)
लगातार हाई BP रहने से धमनियों पर दबाव पड़ता है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।
3. डायबिटीज (Diabetes)
शुगर के मरीजों में हार्ट अटैक का जोखिम सामान्य व्यक्ति से कहीं ज़्यादा होता है। हाई ब्लड शुगर धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।
4. धूम्रपान और तंबाकू सेवन
सिगरेट दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह ऑक्सीजन सप्लाई कम करती है और ब्लड को गाढ़ा बना देती है, जिससे थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।
5. तनाव (Stress)
लगातार मानसिक तनाव, चिंता और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जो दिल पर सीधा असर डालती है।
6. मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
ज्यादा वजन और एक्सरसाइज़ की कमी दिल को धीरे-धीरे कमजोर बना देती है।
7. आनुवंशिक कारण (Genetics)
अगर परिवार में पहले किसी को हार्ट अटैक हो चुका है, तो जोखिम बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक कब आता है? (खतरे का समय और संकेत)
हार्ट अटैक अक्सर अचानक आता है, लेकिन शरीर पहले से कई संकेत देता है, जिन्हें हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
आम समय
> सुबह के समय (5–10 बजे के बीच)
> ज्यादा तनाव या गुस्से के दौरान
बहुत ज्यादा मेहनत या अचानक भारी एक्सरसाइज़ के बाद
> अधिक ठंड या अत्यधिक गर्मी में
> शुरुआती लक्षण (Warning Signs)
> सीने में दबाव, जकड़न या जलन
> बाएं हाथ, कंधे, गर्दन या जबड़े में दर्द
> सांस फूलना
> ज्यादा पसीना आना
> मतली या उल्टी
> चक्कर या कमजोरी
ध्यान दें: महिलाओं में लक्षण अलग हो सकते हैं—जैसे थकान, पीठ दर्द या पेट में जलन।
युवाओं में हार्ट अटैक क्यों बढ़ रहा है?
आज के युवा दिखने में फिट हैं, लेकिन अंदर से नहीं।
जिम के साथ गलत सप्लीमेंट्स
रात-रात भर जागना
ज्यादा कैफीन और एनर्जी ड्रिंक
मोबाइल और स्क्रीन की लत
भावनात्मक तनाव और तुलना की ज़िंदगी
ये सभी चीज़ें मिलकर दिल पर चुपचाप हमला कर रही हैं।
हार्ट अटैक को कैसे रोका जाए? (Prevention & Solution)
1. सही खान-पान अपनाएं
हरी सब्ज़ियां, फल और सलाद
साबुत अनाज
कम नमक और कम चीनी
तला-भुना और जंक फूड सीमित करें
2. नियमित एक्सरसाइज़
रोज़ कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना
योग और प्राणायाम
ज्यादा भारी एक्सरसाइज़ अचानक न करें
3. धूम्रपान और शराब से दूरी
यह सबसे प्रभावी और ज़रूरी कदम है।
4. तनाव को नियंत्रित करें
मेडिटेशन
पर्याप्त नींद
सोशल मीडिया से ब्रेक
अपने मन की बात किसी से साझा करें
5. नियमित हेल्थ चेक-अप
BP
शुगर
कोलेस्ट्रॉल
समय-समय पर जांच करवाना बेहद ज़रूरी है।
6. वजन नियंत्रण
BMI को संतुलित रखें। मोटापा दिल की बीमारियों की जड़ है।
हार्ट अटैक आने पर क्या करें? (Emergency Action)
तुरंत मेडिकल सहायता लें
व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बैठाएं
तंग कपड़े ढीले करें
घबराएं नहीं, समय ही सबसे बड़ा इलाज है
गोल्डन ऑवर: हार्ट अटैक के पहले एक घंटे में इलाज मिल जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य और दिल का रिश्ता
दिल सिर्फ़ खून पंप करने वाली मशीन नहीं है। भावनात्मक दर्द, अकेलापन और अवसाद भी दिल को बीमार बना सकते हैं।
खुश रहना, संतुलित जीवन जीना—ये भी हार्ट अटैक से बचाव का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
हार्ट अटैक कोई अचानक गिरने वाली बिजली नहीं है। यह हमारी गलत आदतों का धीरे-धीरे बनता हुआ परिणाम है। अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं, अगर हम समय रहते जागरूक हो जाएं।
आज ज़रूरत है अपने दिल को सुनने की, अपनी जीवनशैली को सुधारने की और यह समझने की कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं।
क्योंकि एक स्वस्थ दिल ही एक लंबी और खुशहाल ज़िंदगी की कुंजी है
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