क्यों बदला गया ‘धुरंधर’ का वर्ज़न? जानिए ‘बलोच’ संदर्भ से जुड़ा पूरा विवाद
रणवीर सिंह और संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ जब सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई, तो उसने बॉक्स ऑफिस पर आते ही तहलका मचा दिया। दमदार एक्शन, देशभक्ति से भरी कहानी और हाई-लेवल जासूसी मिशन ने दर्शकों को खूब पसंद आया। लेकिन जब फिल्म ज़ोरों पर थी, तभी एक ऐसा विवाद सामने आया, जिसने मेकर्स को फिल्म का संशोधित (Revised) वर्ज़न रिलीज़ करने पर मजबूर कर दिया।
यह बदलाव कोई बड़ा सीन हटाने का नहीं था, बल्कि एक संवेदनशील शब्द से जुड़ा हुआ था, जिसने सोशल मीडिया से लेकर कोर्ट तक बहस छेड़ दी।
क्या था ‘बलोच’ शब्द से जुड़ा विवाद?
फिल्म के एक सीन में संजय दत्त के किरदार द्वारा बोला गया एक डायलॉग चर्चा का विषय बन गया। इस डायलॉग में ‘बलोच’ समुदाय का जिक्र एक नकारात्मक संदर्भ में किया गया था।
कुछ दर्शकों और बलोच समुदाय से जुड़े लोगों का मानना था कि यह संवाद पूरे समुदाय को गलत तरीके से पेश करता है, जिससे भावनाएं आहत हो सकती हैं।
यही कारण था कि इस डायलॉग को लेकर विरोध शुरू हुआ और मामला इतना बढ़ गया कि गुजरात हाईकोर्ट तक एक याचिका दायर कर दी गई। याचिका में कहा गया कि फिल्म का यह संवाद आपत्तिजनक है और इसे हटाया जाना चाहिए।
सरकार का आदेश या मेकर्स का फैसला?
शुरुआती खबरों में यह कहा गया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म के मेकर्स को बदलाव करने का निर्देश दिया है। हालांकि बाद में मंत्रालय की ओर से यह साफ किया गया कि सरकार ने कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया।
फिल्म के निर्माताओं ने खुद आगे बढ़कर यह फैसला लिया कि विवादित शब्द को म्यूट कर दिया जाए, ताकि फिल्म की वजह से किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों और विवाद आगे न बढ़े।
फिल्म में क्या-क्या बदला गया?
1 जनवरी 2026 से सिनेमाघरों में जो वर्ज़न दिखाया जा रहा है, उसमें:
• विवादित डायलॉग से ‘बलोच’ शब्द को म्यूट कर दिया गया है
• कहानी, सीन या फिल्म की लंबाई में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया
• फिल्म की मूल कहानी और एक्शन पूरी तरह बरकरार है
यानी दर्शकों के लिए फिल्म का अनुभव लगभग वही है, बस विवादित शब्द अब सुनाई नहीं देता।
फिल्ममेकर्स का समझदारी भरा कदम
आज के दौर में जब हर फिल्म सोशल मीडिया की निगरानी में रहती है, तब एक शब्द भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। ‘धुरंधर’ के मेकर्स ने मामले को कानूनी लड़ाई में बदलने की बजाय संवेदनशीलता और समझदारी का रास्ता चुना।
यह फैसला इस बात का संकेत है कि अब बॉलीवुड सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी को भी गंभीरता से लेने लगा है।
विदेशों में भी आई थीं मुश्किलें
दिलचस्प बात यह है कि ‘धुरंधर’ को पहले ही कुछ खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर) में रिलीज़ नहीं किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीतिक और जियो-पॉलिटिकल कंटेंट की वजह से फिल्म को वहां अनुमति नहीं मिली, जिससे मेकर्स को करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ।
इसके बावजूद भारत में फिल्म की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा।
बॉक्स ऑफिस पर कायम है ‘धुरंधर’ का जलवा
विवाद और बदलाव के बावजूद ‘धुरंधर’ की कमाई पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा। फिल्म अब तक 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की वर्ल्डवाइड कमाई कर चुकी है और 2025–26 की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जा रही है।
दर्शक अब भी सिनेमाघरों में बड़ी संख्या में फिल्म देखने पहुंच रहे हैं, जिससे साफ है कि कंटेंट मजबूत हो तो विवाद भी उसकी रफ्तार नहीं रोक पाते।
निष्कर्ष
‘धुरंधर’ का संशोधित वर्ज़न यह साबित करता है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से जुड़ा एक शक्तिशाली माध्यम है। जब कोई संवाद गलत संदेश देने लगे, तो उसे सुधारना कमजोरी नहीं बल्कि परिपक्वता होती है।
फिल्म ने यह सिखाया कि देशभक्ति और एक्शन के साथ-साथ संवेदनशीलता और संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
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